Health Tips
स्वस्थ रहने के कुछ उपाय
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| Health Tips (स्वस्थ रहने के कुछ उपाय) |
हम सभी चाहते हैं कि हमारा शरीर स्वस्थ व काया सुंदर हो।
अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए हम तरह-तरह के
उपाय करते हैं पर कई बार नतीजा शून्य होता है। हम आपको बताते हैं
कुछ आसान उपाय, जिनको अमल करना आपके स्वास्थ्य व सौंदर्य दोनों
के लिए बहुत लाभकारी होगा-
* अनियंत्रित रूप से बढ़ता वजन बीमारियों को खुला न्योता देता है। यदि
आप अपने खानपान में बदलाव लाकर स्वयं की दिनचर्या में परिवर्तन लाते
हैं तो ये कुछ हद तक आपके वजन को कम करने में भी मददगार सिद्ध
होगा।
* तैराकी, व्यायाम, साइकलिंग आदि की आदत स्वस्थ व सेहतमंद रहने
में आपकी मदद करेंगे।
* साफ पानी कई बीमारियों का रामबाण इलाज है। यदि आप दिन में
अधिक से अधिक पानी पीते हैं, तो ये आपके रूप लावण्य में अभिवृद्धि
करेगा।
* धूम्रपान आपके शरीर को भीतर से खोखला व कमजोर बनाता है। बेहतर
होगा आप इसका परित्याग करें।
* तैलीय व तीखे मिर्च-मसालों का सेवन करना बंद कर दें।
* तनाव शरीर के लिए बहुत खतरनाक है। यदि आपने इस पर नियंत्रण
कर लिया तो समझिए आपने कई बीमारियों पर विजय पा ली।
* महीने में एक बार शुगर, हीमोग्लोबीन, ब्लडप्रेशर आदि की जाँच जरूर
कराएँ।
अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए हम तरह-तरह के
उपाय करते हैं पर कई बार नतीजा शून्य होता है। हम आपको बताते हैं
कुछ आसान उपाय, जिनको अमल करना आपके स्वास्थ्य व सौंदर्य दोनों
के लिए बहुत लाभकारी होगा-
* अनियंत्रित रूप से बढ़ता वजन बीमारियों को खुला न्योता देता है। यदि
आप अपने खानपान में बदलाव लाकर स्वयं की दिनचर्या में परिवर्तन लाते
हैं तो ये कुछ हद तक आपके वजन को कम करने में भी मददगार सिद्ध
होगा।
* तैराकी, व्यायाम, साइकलिंग आदि की आदत स्वस्थ व सेहतमंद रहने
में आपकी मदद करेंगे।
* साफ पानी कई बीमारियों का रामबाण इलाज है। यदि आप दिन में
अधिक से अधिक पानी पीते हैं, तो ये आपके रूप लावण्य में अभिवृद्धि
करेगा।
* धूम्रपान आपके शरीर को भीतर से खोखला व कमजोर बनाता है। बेहतर
होगा आप इसका परित्याग करें।
* तैलीय व तीखे मिर्च-मसालों का सेवन करना बंद कर दें।
* तनाव शरीर के लिए बहुत खतरनाक है। यदि आपने इस पर नियंत्रण
कर लिया तो समझिए आपने कई बीमारियों पर विजय पा ली।
* महीने में एक बार शुगर, हीमोग्लोबीन, ब्लडप्रेशर आदि की जाँच जरूर
कराएँ।
* अगर सुख की नींद सोना हो तो सोते समय 'चिंता' न करें, प्रभुनाम का
'चिंतन' करें।
* पाचन शक्ति ठीक रखनी हो तो ठीक वक्त पर भोजन करें और प्रत्येक
कौर को 32 बार चबाएँ।
* यह गलतफहमी है कि अण्डा, माँस खाने से बल बढ़ता है और शराब
पीने से आनंद आता है। अण्डा, माँस खाने से शरीर मोटा-तगड़ा जरूर हो
सकता है पर कुछ बीमारियाँ भी इसी से पैदा होती हैं। शराब पीने से
आनंद नहीं आता, बेहोशी आती है और बीमारियाँ होती हैं।
* अपनी आर्थिक शक्ति से अधिक धन खर्च करने वाला कर्जदार हो जाता
है। अपनी शारीरिक शक्ति से अधिक श्रम करने वाला कमजोर हो जाता है।
अपनी क्षमता से अधिक विषय भोग करने वाला जल्दी बूढ़ा और नपुंसक
हो जाता है और अपने से अधिक बलवान से शत्रुता करने वाला नष्ट हो
जाता है।
* भोजन करते समय और सोते समय किसी भी प्रकार की चिंता, क्रोध या
शोक नहीं करना चाहिए। भोजन से पहले हाथ और सोने से पहले पैर
धोना तथा दोनों वक्त मुँह साफ करना हितकारी होता है।
* यदि आप मुफ्त में स्वस्थ और चुस्त बने रहना चाहते हैं तो आपको
तीन काम करना चाहिए। पहला तो प्रातः जल्दी उठकर वायु सेवन के लिए
लम्बी सैर के लिए जाना और दूसरा ठीक वक्त पर खूब अच्छी तरह चबा-
चबाकर खाना तथा तीसरा दोनों वक्त शौच अवश्य जाना।
* बीमारी की अवस्था में, बीमारी से मुक्त होने के बाद, भोजन करने के
बाद, परिश्रम या यात्रा से थके होने पर प्रातःकाल तथा सूर्यास्त के समय
और उपवास करते समय विषय भोग करना बहुत हानिकारक होता है।
'चिंतन' करें।
* पाचन शक्ति ठीक रखनी हो तो ठीक वक्त पर भोजन करें और प्रत्येक
कौर को 32 बार चबाएँ।
* यह गलतफहमी है कि अण्डा, माँस खाने से बल बढ़ता है और शराब
पीने से आनंद आता है। अण्डा, माँस खाने से शरीर मोटा-तगड़ा जरूर हो
सकता है पर कुछ बीमारियाँ भी इसी से पैदा होती हैं। शराब पीने से
आनंद नहीं आता, बेहोशी आती है और बीमारियाँ होती हैं।
* अपनी आर्थिक शक्ति से अधिक धन खर्च करने वाला कर्जदार हो जाता
है। अपनी शारीरिक शक्ति से अधिक श्रम करने वाला कमजोर हो जाता है।
अपनी क्षमता से अधिक विषय भोग करने वाला जल्दी बूढ़ा और नपुंसक
हो जाता है और अपने से अधिक बलवान से शत्रुता करने वाला नष्ट हो
जाता है।
* भोजन करते समय और सोते समय किसी भी प्रकार की चिंता, क्रोध या
शोक नहीं करना चाहिए। भोजन से पहले हाथ और सोने से पहले पैर
धोना तथा दोनों वक्त मुँह साफ करना हितकारी होता है।
* यदि आप मुफ्त में स्वस्थ और चुस्त बने रहना चाहते हैं तो आपको
तीन काम करना चाहिए। पहला तो प्रातः जल्दी उठकर वायु सेवन के लिए
लम्बी सैर के लिए जाना और दूसरा ठीक वक्त पर खूब अच्छी तरह चबा-
चबाकर खाना तथा तीसरा दोनों वक्त शौच अवश्य जाना।
* बीमारी की अवस्था में, बीमारी से मुक्त होने के बाद, भोजन करने के
बाद, परिश्रम या यात्रा से थके होने पर प्रातःकाल तथा सूर्यास्त के समय
और उपवास करते समय विषय भोग करना बहुत हानिकारक होता है।
* यदि आप सुख चाहते हैं तो दुःख देने वाला काम न करें, यदि आप
आनंद चाहते हैं तो स्वास्थ्य की रक्षा करें। यदि आप स्वास्थ्य चाहते हैं तो
व्यायाम और पथ्य का सेवन करें। संसार के सब सुख स्वस्थ व्यक्ति ही
भोग सकता है। कहा भी गया है- पहला सुख निरोगी काया।
आनंद चाहते हैं तो स्वास्थ्य की रक्षा करें। यदि आप स्वास्थ्य चाहते हैं तो
व्यायाम और पथ्य का सेवन करें। संसार के सब सुख स्वस्थ व्यक्ति ही
भोग सकता है। कहा भी गया है- पहला सुख निरोगी काया।
* शरीर को हमेशा सीधा रखें यानी बैठें तो तनकर, चलें तो तनकर, खड़े
रहें तो तनकर अर्थात शरीर हमेशा चुस्त रखें।
* भोजन से ही स्वास्थ्य बनाने का प्रयास करें। इसका सबसे सही तरीका
है, भोजन हमेशा खूब चबा-चबाकर आनंदपूर्वक करें ताकि पाचनक्रिया ठीक
रहे, इससे कोई भी समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी।
* मोटापा आने का मुख्य कारण तैलीय व मीठे पदार्थ होते हैं। इससे चर्बी
बढ़ती है, शरीर में आलस्य एवं सुस्ती आती है। इन पदार्थों का सेवन
सीमित मात्रा में ही करें।
* गरिष्ठ-भारी भोजन या हजम न होने वाले भोजन का त्याग करें। यदि
ऐसा करना भी पड़े तो एक समय उपवास कर उसका संतुलन बनाएँ।
* वाहन के प्रति मोह कम कर उसका प्रयोग कम करने की आदत डालें।
जहाँ तक हो कम दूरी के लिए पैदल जाएँ। इससे मांसपेशियों का व्यायाम
होगा, जिससे आप निरोगी रहकर आकर्षक बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण
की रक्षा में भी सहायक होंगे।
* भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में फल-सब्जियों का प्रयोग करें।
उनसे आवश्यक तैलीय तत्व प्राप्त करें, शरीर के लिए आवश्यक तेल की
पूर्ति प्राकृतिक रूप के पदार्थों से ही प्राप्त करें।
* दिमाग में सुस्ती नहीं आने दें, कार्य को तत्परता से करने की चाहत रखें।
* घर के कार्यों को स्वयं करें- यह कार्य अनेक व्यायाम का फल देते हैं।
* व्यस्तता एक वरदान है, यह दीर्घायु होने की मुफ्त दवा है, स्वयं को
व्यस्त रखें।
* कपड़े अपने व्यक्तित्व के अनुरूप पहनें। थोड़े चुस्त कपड़े पहनें, इससे
फुर्ती बनी रहेगी।
* जीवन चलने का नाम है, गतिशीलता ही जीवन है, यह सदा ही याद
रखें।
* अपने जीवन में लक्ष्य, उद्देश्य और कार्य के प्रति समर्पण का भाव रखें।*
सुबह एवं रात में मंजन अवश्य करें। साथ ही सोने से पूर्व स्नान कर कपड़े
बदलकर पहनें। आप ताजगी महसूस करेंगे।
रहें तो तनकर अर्थात शरीर हमेशा चुस्त रखें।
* भोजन से ही स्वास्थ्य बनाने का प्रयास करें। इसका सबसे सही तरीका
है, भोजन हमेशा खूब चबा-चबाकर आनंदपूर्वक करें ताकि पाचनक्रिया ठीक
रहे, इससे कोई भी समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी।
* मोटापा आने का मुख्य कारण तैलीय व मीठे पदार्थ होते हैं। इससे चर्बी
बढ़ती है, शरीर में आलस्य एवं सुस्ती आती है। इन पदार्थों का सेवन
सीमित मात्रा में ही करें।
* गरिष्ठ-भारी भोजन या हजम न होने वाले भोजन का त्याग करें। यदि
ऐसा करना भी पड़े तो एक समय उपवास कर उसका संतुलन बनाएँ।
* वाहन के प्रति मोह कम कर उसका प्रयोग कम करने की आदत डालें।
जहाँ तक हो कम दूरी के लिए पैदल जाएँ। इससे मांसपेशियों का व्यायाम
होगा, जिससे आप निरोगी रहकर आकर्षक बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण
की रक्षा में भी सहायक होंगे।
* भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में फल-सब्जियों का प्रयोग करें।
उनसे आवश्यक तैलीय तत्व प्राप्त करें, शरीर के लिए आवश्यक तेल की
पूर्ति प्राकृतिक रूप के पदार्थों से ही प्राप्त करें।
* दिमाग में सुस्ती नहीं आने दें, कार्य को तत्परता से करने की चाहत रखें।
* घर के कार्यों को स्वयं करें- यह कार्य अनेक व्यायाम का फल देते हैं।
* व्यस्तता एक वरदान है, यह दीर्घायु होने की मुफ्त दवा है, स्वयं को
व्यस्त रखें।
* कपड़े अपने व्यक्तित्व के अनुरूप पहनें। थोड़े चुस्त कपड़े पहनें, इससे
फुर्ती बनी रहेगी।
* जीवन चलने का नाम है, गतिशीलता ही जीवन है, यह सदा ही याद
रखें।
* अपने जीवन में लक्ष्य, उद्देश्य और कार्य के प्रति समर्पण का भाव रखें।*
सुबह एवं रात में मंजन अवश्य करें। साथ ही सोने से पूर्व स्नान कर कपड़े
बदलकर पहनें। आप ताजगी महसूस करेंगे।
* शरीर का प्रत्येक अंग-प्रत्यंग रोम छिद्रों के माध्यम से श्वसन करता है।
इसीलिए शयन के समय कपड़े महीन, स्वच्छ एवं कम से कम पहनें। सूती
वस्त्र अतिउत्तम होते हैं।
* बालों को हमेशा सँवार कर रखें। अपने बालों में तेल का नियमित
उपयोग करें। बाल छोटे, साफ रखें, अनावश्यक बालों को साफ करते रहें।
* नियमित रूप से अपने आराध्य देव के दर्शन हेतु समय अवश्य निकालें।
आप चाहे किसी भी धर्म के अनुयायी हों, अपनी धर्म पद्धति के अनुसार
ईश्वर की प्रार्थना अवश्य करें।
* क्रोध के कारण शरीर, मन तथा विचारों की सुंदरता समाप्त हो जाती है।
क्रोध के क्षणों में संयम रखकर अपनी शारीरिक ऊर्जा की हानि से बचें।
* मन एवं वाणी की चंचलता से अनेक अवसरों पर अपमानित होना पड़
सकता है। अतः वाणी में संयम रखकर दूसरों से स्नेह प्राप्त करें, घृणा
नहीं।
इसीलिए शयन के समय कपड़े महीन, स्वच्छ एवं कम से कम पहनें। सूती
वस्त्र अतिउत्तम होते हैं।
* बालों को हमेशा सँवार कर रखें। अपने बालों में तेल का नियमित
उपयोग करें। बाल छोटे, साफ रखें, अनावश्यक बालों को साफ करते रहें।
* नियमित रूप से अपने आराध्य देव के दर्शन हेतु समय अवश्य निकालें।
आप चाहे किसी भी धर्म के अनुयायी हों, अपनी धर्म पद्धति के अनुसार
ईश्वर की प्रार्थना अवश्य करें।
* क्रोध के कारण शरीर, मन तथा विचारों की सुंदरता समाप्त हो जाती है।
क्रोध के क्षणों में संयम रखकर अपनी शारीरिक ऊर्जा की हानि से बचें।
* मन एवं वाणी की चंचलता से अनेक अवसरों पर अपमानित होना पड़
सकता है। अतः वाणी में संयम रखकर दूसरों से स्नेह प्राप्त करें, घृणा
नहीं।

Nice post
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